This is the assertion of anyone's right to be heard...
Friday, February 24, 2012
ईंट क्रांति का आख़िरी हथियार होती हैं
ईंट से ईंट जोड़ कर बनती हैं दीवारें आदमी और आदमी के बीच उगती हैं दीवारें लोग दीवारों को अकेला पा कर उनसे करते हैं संवाद कुछ आवारा नौजवान लिख देते हैं उस पर अपनी प्रेमिका का नाम कुछ लोग उकेरते हैं अपनी वेदना या देते हैं कोई पैगाम दीवार विचार की हो या आचार की खडी हो रही हैं रातों रात अपनों के बीच कुछ लोग बनाते हैं दीवारें कुछ लोग ढहाते हैं दीवारें कुछ लोग सजाते हैं दीवारें कातिलों के डर से बनी एक दीवार देख कर विश्व के लोग आज तक आश्चर्यचकित हैं कुछ दीवारें से किसी को कोई आश्चर्य नहीं जब सभ्यता सहमती है तो बनती है दीवार जब सभ्यता समझती है तो ढहती है दीवार आओ यह दीवार ढहा दें इसकी ईंट से ईंट बजा दें ईंट सभ्यता का पहला औजार होती है ईंट क्रांति का आख़िरी हथियार होती हैं."-------- राजीव चतुर्वेदी
No comments:
Post a Comment