Monday, March 19, 2012

तू अगर खुदा है तो खुद्दार मैं भी हूँ

"मेरे हक को तू नकार दे
मेरे हौसले का हिसाब दे
जो फासला था दरमियां
वह आज भी घटा नहीं
तू अगर खुदा है तो खुद्दार मैं भी हूँ
में मजहबों में बंटा नहीं इबादतों से हटा नहीं
तू है देवता तो ये बता ये रास्ता क्यों अजीब है
गुनाह तो मेने नहीं किया फिर ये क्यों मेरा नसीब है
जहान में तू जहां भी है मुझे आज तक तू दिखा नहीं कभी तू कहीं मिला नहीं
तेरे बिना में कल भी था तेरे बिना में अब भी हूँ
ये वहम था मेरे जहन का जो आज तक मिटा नहीं ."
--- राजीव चतुर्वेदी

3 comments:

सदा said...

अनुपम भाव संयोजन के साथ बेहतरीन प्रस्‍तुति

रश्मि प्रभा... said...

तू है खुद्दार
यह मेरी खुदाई है
जो है रंग बेरंग वह ईमान से बेवफाई है

संजय भास्कर said...

........बहुत खूब...बेहतरीन प्रस्तुति...